Sunday, March 29, 2009

अल्लाह तुम्हे अपनी पनाह में रखे. आमीन!

लगता है की जैसे अभी आवाज़ आएगी "अमित जी दो पिक्चर और मैंने फोल्डर में डाली हैं." और बस पांच ही मिनट बाद फिर पूछेगा 'पिक्चर हो गयी अमितजी?' मगर वो वक़्त अब इतिहास का एक पन्ना बन गया है. आज हमारा हरदिल अज़ीज़ दोस्त कासिम हम सबको छोड़ कर अपने आखिरी सफ़र की तरफ निकल पड़ा है। बस एक ही महीना हुआ होगा जब मुझे वो शाम को सबके साथ ऑफिस में बैठ कर बातें करता हुआ दिखा था और मैंने उसको भी रूटीन में बाय कहा था। उस वक़्त अंदाजा भी नहीं था की वो हमारी आखिरी बाय होने वाली है. कासिम से मेरी बातें ज्यादातर बाटला हॉउस एनकाउंटर मामले पर हुयी थी। कासिम को हमेशा से दुःख था की मुसलमानों को आतंकवादियो की नज़र से देखा जाता है। मेरे ख़याल से उसके आस पास के माहौल ने उसे इस तरह का बना दिया था। याद है मुझे जब वो हमारे ऑफिस के गार्डस से लड़ पड़ा था की वो उसका ही बैग खुलवा कर क्यूँ चेक करते हैं। एक सन्डे को कासिम ने मुझे, मेरेन को और हसन को नॉन-वेज का लंच करवाया था। नॉन-वेज कासिम को बहुत पसंद था और पुरानी दिल्ली का होने वजह से खाने की तरफ उसका रुझान भी बहुत था। और फिर सिर्फ चौबीस पच्चीस साल की उम्र में रुखसती होना और हंसते मुस्कुराते इन्तेकाल फरमा जाना अपने साथियों और परिवार वालो के लिए एक बड़ा सदमा है. आज भी जब दिल्ली गेट के पास से निकलते हैं तो याद आता है की यहाँ हम कासिम को ड्राप करते हैं। मगर अब कासिम अपने आखिरी सफ़र निकल चूका है और मेरी परवरदिगार और उस दो जहाँ के मालिक से दुआ है की उसका ये सफ़र उसके लिए अल्लाह की तमाम नेमतें बख्शे और अगर उससे कोई खता हो गयी हो तो मालिक उसे अपना समझ कर मुआफ करे. कासिम तुम हमेशा हमें याद रहोगे. बात करते वक़्त तुम्हारा अपने होंटों को गीला करते रहना तुम्हारी याद के साथ ही जुडा रहेगा. अल्लाह तुम्हे अपनी पनाह में रखे. आमीन!

2 comments:

नितिन माथुर said...

सुम-आमीन

Amit said...

What moves through us is a silence, a quiet sadness, a longing for one more day, one more word, one more touch, we may not understand why you left this earth so soon, or why you left before we were ready to say good-bye, but little by little, we begin to remember not just that you died, but that you lived. And that your life gave us memories too beautiful to forget.
I pray for his soul to rest in peace.

From :-Amit Qazi, Rajender Nanda, Rakesh Pandey, Meenakshi Thotha, Aakash, Nishtha, Sankoch, Pankaj Pareek.

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