Monday, February 1, 2010

ये स्वयंवर नहीं व्यभिचार है...

लो जी महाराज एक और स्वयंवर आ गया। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में स्वयंवर का विधान नारी जाति के उत्थान और गरिमा का साक्षात् उदाहरण था मगर ये स्वयंवर तो व्यभिचार का टीवी संस्करण है. एक पुरुष जो अपनी ब्याहता वधु से अलग हो चुका है और जिसका कारण उस स्त्री का प्रतारणा का आरोप रहा है अब सज-धज कर एनडीटीवी इमेजिन पर अपना स्वयंवर रचा रहा है. अव्वल तो एक अत्याचारी और घोर लडकिवादी पुरुष को विवाह का यूं सामाजिक उपहास नहीं उड़ाना चाहिए और दूसरे जब पुरुषो के स्वयंवर का कहीं विधान ही नहीं है तो केवल टीवी दर्शको को बेवक़ूफ़ बनाने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन करने की घोर भर्त्सना की जानी चाहिए.

एनडीटीवी इमेजिन ने अब धीरे-धीरे हार का स्वाद चखना शुरू कर दिया है. इमेजिन के दो धुआंधार कार्यक्रम आयोजको की बेवकूफी के चलते धाराशाई हो चुके हैं। पहले तो 'सच का सामना' से इमेजिन को मूंह की खानी पड़ी और फिर 'राज़ पिछले जनम का' ने दर्शको के बीच अंधविश्वास को बढाने का आरोप झेला. पता नहीं क्यूँ एक नया धारावाहिक होते हुए भी 'स्वयंवर' को हमारे दिल से शुभकामनाय नहीं निकल रही हैं. स्वयंवर-एक में राखी सावंत ने सगाई कर ली और अब ईलेश को छोड़कर फिर शायद स्वयंवर-तीन के लिए तैयार हो रही हैं. सबसे मज़े की बात तो ये है की अपने ही पिछले सीज़न की वाट लगाते हुए राहुल महाजन कहते हैं 'स्वयंवर नहीं शादी'.


राहुल महाजन ने अपने प्रभावशाली पिता के नाम को बदनाम किस तरह किया है ये तो सभी ने देखा जब पिता के गुजरने के बाद ही वो नशे में मौत से जूझते हुए पाए गए. उसके बाद जब 'बिग बॉस' में पदार्पण किया तो लड़कीबाज़ की एकदम छिछोरी इमेज बनाई. मुझे तो समझ नहीं आ रहा की 'स्वयंवर' के निर्माताओ ने क्या सोचकर राहुल महाजन के स्वयंवर का विचार पारित कर दिया.

यहाँ मैं ज़िक्र करना चाहूँगा विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल, शिव सेना, दुर्गा वाहिनी आदि का जिनको सनातन संस्कृति का ये उपहास दिखाई नहीं देता. स्वयंवर का शाब्दिक अर्थ है स्वयं वर का चुनाव करना और इस भाव से देखें तो भी राहुल महाजन स्वयं के लिए वर नहीं वधु ढूंढ रहे हैं. मुझे चिंता और दुःख उन लडकियों के लिए है जो बेचारी प्रचार पाने की खातिर इस भव्य मगर वाहियात आयोजन का हिस्सा बन रही हैं. राहुल ने तो सिर्फ एक लड़की को पसंद करना है अपने हरम के लिए तो बाकी बेचारी क्यूँ अपनी ज़िन्दगी बर्बाद कर रही हैं. ईलेश के अलावा जो भी लड़के और अब तो खुद ईलेश भी 'राखी के स्वयंवर' से दुःख के अलावा कुछ हासिल नहीं कर पाए तो ये तो बेचारी लडकिया हैं.

आपसे मेरा निवेदन है एनडीटीवी इमेजीन को फ़ोन करें, ईमेल करें, पत्र लिखें और हर समभाव प्रयास करके इस घटिया कार्यक्रम को जल्द से जल्द बंद करवाएं. जय हिंद

1 comment:

सुजीत कुमार said...

बढ़िया अमित जी...

विचारको की मित्रमंडली